Friday, 13 September 2019

भारत कभी नही भूल पायेगा इन 3 पारियों को, नं. 1 के आगे पूरी भारतीय टीम ने टेक दिए थे घुटने

टीम इंडिया पूरी दुनिया में अपनी बल्लेबाजी के लिए मशहूर है और देशों के मुकाबले भारतीय टीम के पास अच्छी गेंदबाजी नहीं है, लेकिन बल्लेबाजी में टीम इंडिया बहुत आगे हैं. क्रिकेट में कई ऐसे मुकाबले हुए हैं. जिसमें टीम इंडिया ने खराब गेंदबाजी की वजह से मैच गंवाया है.


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आज हम आपको उन पारियों के बारे में बताने वाले हैं, जिन्हें भारतीय टीम के गेंदबाज कभी नहीं भूल सकेंगे.

3. रिकी पोंटिंग की पारी



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20 साल बाद 2003 विश्व कप के फाइनल में पहुंची भारतीय टीम की फाइनल में बहुत दुर्दशा हुई. इस मुकाबले में टीम इंडिया के कप्तान सौरभ गांगुली ने टॉस जीता और ऑस्ट्रेलिया को बल्लेबाजी करने को बुलाया।
ओपनर एडम गिलक्रिस्ट और मैथ्यू हैडन ने टीम इंडिया के गेंदबाजों जहीर खान और श्रीनाथ को निशाना बनाते हुए ताबड़तोड़ शुरुआत की। ऑस्ट्रेलिया के पहले पचास रन केवल 40 गेंदों पर और सौ रन 92 गेंदों पर बन चुके थे। इन दोनों ने भारतीय गेंदबाजों की बेरहमी से पिटाई की।
श्रीनाथ, जहीर और आशीष नेहरा की असफलता के बाद 105 के स्कोर पर गिलक्रिस्ट और 125 के स्कोर पर मैथ्यू हैडन को आउट कर हरभजन सिंह ने टीम इंडिया के लिए उम्मीदें जगाईं। इसके बाद मोर्चा संभाला रिकी पोंटिंग और डेमियन मार्टिन ने।
"उस दिन पोंटिंग न जाने क्या खा के आया था. आलम ये था की रिकी पोंटिंग ने 121 गेंदों पर चार चौकों और आठ छक्कों की मदद से 140 रन ठोक डाले"
जिसका नतीजा यह रहा की पोंटिंग ने कंगारुओं के स्कोर को 359 तक पहुंचा दिया।
जवाब में 360 रन के खिताबी लक्ष्य का पीछा करने उतरी टीम इंडिया की सारी उम्मीदें सचिन पर थीं जो टूर्नामेंट में शानदार बल्लेबाजी कर रहे थे। पहले ही ओवर में सचिन ने मैकग्रा पर चौका जड़ा तो ये लगा कि मुकाबला टक्कर का होगा लेकिन मैकग्रा ने पांचवी गेंद पर ही सचिन को अपना शिकार बना टीम इंडिया को जबर्दस्त झटका दे दिया। सचिन के आउट होते ही कंगारू खुशी से झूम उठे।
टीम इंडिया की शुरुआत ही खराब हुई इसके बाद वीरेंद्र सहवाग ने पहले गांगुली और बाद में राहुल द्रविड़ के साथ मिलकर किला लड़ाने की कोशिश की लेकिन पहाड़ सी चुनौती को पार करने के लिए यह नाकाफी था। टीम इंडिया केवल 360 रनों के जवाब में केवल 234 रन ही बना सकी। सहवाग ने सर्वाधिक 82 रन बनाए।
इस जीत के साथ ही पोंटिंग की टीम ने विश्व कप पर कब्जा कर लिया। फाइनल में शानदार पारी खेलने वाले पोंटिंग मैन ऑफ द फाइनल चुने गए। 

2. एबी डिविलियर्स की पारी



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25 अक्टूबर 2015 को इंडिया और साउथ अफ्रीका के बीच मुकाबला हुआ. पहले बल्लेबाजी करने आई दक्षिण अफ्रीका के बल्लेबाजों ने 50 ओवरों में महज चार विकेट के स्कोर पर 438 रनों का पहाड़ जैसा स्कोर खड़ा कर डाला।
क्विंटन डि काक ने 109 रन की पारी खेली तो फाफ डु प्लेसिस ने रिटायर्ड हर्ट होने से पहले 133 रन बनाए। पर अभी असली कत्लेआम बाकी था।
"दक्षिण अफ्रीकी कप्तान एबी डिविलियर्स ने भारतीय गेंदबाजी की बखिया उधेड़ते हुए महज 61 गेंदों पर 11 छक्के जड़ते हुए 119 रन ठोक दिए"
आलम यह था कि आखिर के दस ओवरों में दक्षिण अफ्रीका ने 144 रन ठोक दिए। यह केवल दूसरा अवसर था जब वनडे में किसी एक पारी में तीन बल्लेबाजों ने शतक जमाए। पहली बार भी दक्षिण अफ्रीका ने इसी साल वेस्टइंडीज के खिलाफ जोहानिसबर्ग में यह कारनामा किया था। 
रनों के पहाड़ के आगे दबाव में भारतीय बल्लेबाजी भहरा गई और पूरी टीम सिर्फ 35.5 ओवर में 224 रन पर सिमट गई। भारत ने अपने आखरी आठ विकेट 13.2 ओवर और 68 रन के अंदर गंवाए।
सिर्फ अजिंक्य रहाणे और शिखर धवन ही दक्षिण अफ्रीकी गेंदबाजों का कुछ प्रतिरोध कर पाए जिन्होंने क्रम से 87 और 60 रन बनाए। कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने 27 रन बनाए।
रनों के लिहाज से वनडे में भारत की यह अपनी धरती पर सबसे बड़ी और ओवरआल दूसरी बड़ी हार है। इससे पहले श्रीलंका ने 2000 में शारजाह में उसे 245 रन से हराया था।

1. सईद अनवर की पारी



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भारत और पाकिस्तान के बीच वनडे सीरीज की शुरुआत चेन्नई से हुई है। चेपॉक का एमए चिदंबरम स्टेडियम कई ऐतिहासिक मुकाबलों का गवाह रहा है। इसमें से सबसे खास था 21 मई 1997 को भारत और पाकिस्तान के बीच खेला गया पेप्सी इंडी-पेंडेंस कप का मुकाबला।
उस समय इंडियन वनडे टीम की कमान सचिन तेंदुलकर के हाथ में थी। पाकिस्तान के कप्तान रमीज राजा ने टॉस जीत कर पहले बल्लेबाजी का फैसला किया था।
विस्फोटक बल्लेबाज सईद अनवर ने ताबड़तोड़ बल्लेबाजी की थी। उन्होंने वेंकटेश प्रसाद से लेकर अनिल कुंबले तक को अपना निशाना बनाते हुए मैदान के हर कोने में रन बनाए।
"सईद अनवर ने महज 146 गेंदों का सामना करते हुए उन्होंने 22 चौकों और 5 गगन चुंबी छक्कों की मदद से बेहतरीन 194 रन बना दिए थे"
उनकी इसी तूफानी पारी के दम पर पाकिस्तान 297 रन के स्कोर तक पहुंच गया था।
अपने प्रमुख गेंदबाजों के फेल होने के बाद कप्तान तेंडुलकर ने खुद गेंदबाजी मोर्चा संभालने का फैसला किया। हालांकि, उनकी भी जम कर धुनाई हुई, लेकिन वे अनवर को 200 रन के करिश्माई आंकड़े को पार करने से रोकने में सफल हुए। तेंडुलकर ने अनवर को 194 रन के स्कोर पर सौरव गांगुली के हाथों कैच करवा कर आउट किया था। 
अनवर की बैटिंग देख कर लग रहा था कि सईद अनवर वनडे इतिहास का पहला दोहरा शतक लगाने में कामयाब हो जाएंगे, लेकिन सचिन ने उन्हें आउट कर इस सपने को तोड़ दिया था।
सईद अनवर उस मैच में भले ही 200 रन नहीं बना सके थे, लेकिन उन्होंने 194 रन बना कर वेस्ट इंडीज के दिग्गज सर विवियन रिचर्ड्स के नाबाद 189 रन के रिकॉर्ड को पीछे करते हुए सबसे बड़े वनडे स्कोर का कीर्तिमान स्थापित कर दिया था। 
रिचर्ड्स ने 31 मई 1984 को मेनचेस्टर में इंग्लैंड के खिलाफ वह पारी खेली थी। नाबाद 189 रन बनाने के लिए उन्होंने 21 चौके और 5 छक्के लगाए थे।
उस मैच में टीम इंडिया को 35 रन से पराजय झेलनी पड़ी थी। पाकिस्तान द्वारा दिए 328 रन के टार्गेट का पीछा करते हुए भारतीय बल्लेबाज 292 रन बना कर ऑलआउट हो गए थे।