Friday, 17 April 2020

अगर डालमिया नहीं होते तो खत्म हो जाता शोएब अख्तर का करियर, पीसीबी के पूर्व अध्यक्ष का खुलासा



कोरोना वायरस के चलते इन दिनों में लगभग पूरी दुनिया लॉकडाउन में जा चुकी है। इस दौरान जहां सब कुछ थम गया है वहीं खेल जगत के दिग्गज खिलाड़ी और विशेषज्ञ सोशल मीडिया के जरिये पुराने दिनों को याद करते हुए खुलासे कर रहे हैं। इस फेहरिस्त में पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) के पूर्व अध्यक्ष तौकीर जिया का नाम भी शामिल हो गया है। तौकीर जिया ने पाकिस्तान के पूर्व तेज गेंदबाज शोएब अख्तर को चौंका देने वाला खुलासा करते हुए कहा कि अगर बीसीसीआई के पूर्व अध्यक्ष जगमोहन डालमिया नहीं होते तो वक्त से पहले रावलपिंडी एक्सप्रेस का करियर खत्म हो जाता।
तौकीर जिया ने साल 1999 में शोएब अख्तर पर आईसीसी की ओर से चल रहे संदिग्ध एक्शन मामले को याद करते हुए कहा कि यह जगमोहन डालमिया ही थे जिनकी वजह से शोएब अख्तर पर बैन नहीं लगा नहीं तो 1997 में अपना करियर शुरु करने वाले अख्तर के करियर का अंत महज 2 साल में हो जाता।
तौकिर ने कहा कि आईसीसी के अध्यक्ष रहे दिवंगत जगमोहन डालमिया मदद नहीं करते तो शायद शोएब अख्तर का करियर 2000-01 में ही खत्म हो जाता।
गौरतलब है कि बीसीसीआई के पूर्व अध्यक्ष जगमोहमन डालमिया, जो कि भारतीय क्रिकेट के सबसे बड़े प्रशासकों में शामिल हैं ने साल 1997 से लेकर 2000 के बीच आईसीसी के अध्यक्ष पद को भी संभाला था। साल 1999 में शोएब अख्तर के गेंदबाजी ऐक्शन को लेकर आईसीसी ने पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड को जांच की बात बताई थी। इस दौरान रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल तौकिर जिया पीसीबी अध्यक्ष पद पर काम कर रहे थे। वह 1999 से 2003 तक इस पद पर काबिज रहे।
उन्होंने कहा,'जब शोएब अख्तर के गेंदबाजी एक्शन को संदिग्ध बताकर कार्रवाई हो रही थी तो तत्कालीन आईसीसी अध्यक्ष जगमोहन डालमिया ने हमारी काफी मदद की थी। आईसीसी के सदस्यों की ओर से लगातार शोएब अख्तर का ऐक्शन गलत बताने को लेकर जोर देने के बावजूद डालमिया हमारे साथ रहे और एक्शन को सही करार दिया।
तौकिर ने आगे बताया कि डालमिया और मैंने जो स्टैंड लिया उसके बाद आईसीसी को आखिर यह मानना पड़ा कि शोएब अख्तर के दाएं हाथ में जन्म से परेशानी है, इसके बाद उन्हें अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में खेलते रहने की इजाजत दे दी गई।
आपको बता दें कि शोएब अख्तर ने अपने टेस्ट करियर की शुरुआत साल 1997 में वेस्टइंडीज के खिलाफ अपने घरेलू मैदान रावलपिंडी में ही की थी।