Thursday, 14 May 2020

अपने मासूमों को रखें सहेजकर, कोरोना लेगा 2.53 लाख बच्चों की जान !

अपने मासूमों को रखें सहेजकर, कोरोना लेगा 2.53 लाख बच्चों की जान !
नई दिल्ली। कोरोना वायरस ( Coronavirus ) का संक्रमण जिस तेजी से बढ़ रहा है उसकी वजह से पूरी दुनिया की चिकित्सा सेवाएं बुरी तरह चरमरा गई हैं। लॉकडाउन होने के कारण लोगों को भोजन की उपलब्धता भी सही से नहीं पा रही है। इसके चलते मां एवं शिशु के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका जाहिर की गई है।
अमेरिका की जॉन हापकिन्स यूनिवर्सिटी ( Johns Hopkins University ) ने अपने एक शोध में दावा किया है कि अगले छह महीनों में पांच साल तक की उम्र के 2.53 लाख बच्चों की अतिरिक्त मौतें हो सकती हैं। हापकिन्स यूनिवर्सिटी के शोध को लासेंट जर्नल के ताजा अंक में प्रकाशित किया गया है।
शोध में कहा गया है 118 निम्न एवं मध्यम आय वाले देशों में स्वास्थ्य सेवाएं ( Health Services ) कोरोना वायरस के संक्रमण के इलाज पर केंद्रित होने से मातृ एवं शिशु से जुड़ीं सामान्य चिकित्सा सेवाएं बुरी तरह से प्रभावित हुई हैं। इसलिए अब दूसरी, बीमारी के डर, लॉकडाउन आदि कारणों से जरूरी स्वास्थ्य सेवाएं भी लोगों की पहुंच से दूर हो गई हैं।
इस दौरान कम आय वाले लोगों के काम-धंधा खोने के कारण प्रभावित लोगों की भोजन तक पहुंच घटी है, जिससे कुपोषण ( Malnutrition ) बढ़ने की आशंका जताई जा रही है जो कि मातृ एवं शिशु मृत्यु दर का प्रमुख कारण बनता है। शोधकर्ताओं ने कहा कि इन स्थितियों को अपने शोध ( Research ) का आधार बनाया है।
जिसके मुताबिक अगर न्यूनतम प्रभाव से आंकलन करते हैं तो 9.8 से 18.5 फीसदी तक मृत्यु दर में इजाफा होने की आशंका है। इससे छह महीनों में पांच साल तक के 2,53,500 अतिरिक्त शिशुओं की मौतें होंगी। इस अवधि में 12,200 मातृ मौतें बढ़ेंगी।
दूसरी ओर सबसे खराब स्थिति को मानकर आकलन किया जाए तो 39.3 से 51.9 फीसदी तक मौतें बढ़ सकती हैं। इससे 11,57,000 शिशुओं तथा 56,700 माताओं की अतिरिक्त मौतें हो सकती हैं। ये हकीकत है कि कोरोना पर फोकस होने की वजह से सामान्य चिकित्सा सेवा को नजरअंदाज किया जा रहा है।