Tuesday, 19 May 2020

आखिर गांधारी अपने पुत्र दुर्योधन को निर्वस्त्र क्यों देखना चाहती थी; जानिए


गांधारी कौरवों की मा थी और उसे ये वरदान प्राप्त था कि वह जिसके भी शरीर को सबसे पहले अपने आँखों की पट्टी हटा कर देखेगी तो उसका शरीर वज्र के समान कठोर हो जाएगा। इसलिए वह अपने पुत्र दुर्योधन को देखना चाहती थी। वह धृतराष्ट्र की पत्नी थी जो जन्म से अंधे थे इसलिए अपना पत्नी धर्म निभाते हुए उसने भी आजीवन आँखों पर पट्टी बांध कर रहने का निर्णय किया।
गांधारी अपनी आँखों की पट्टी खोल कर अपने बेटे दुर्योधन को देखना चाहती थी लेकिन श्रीकष्ण इस बात को पहले से जानते थे कि गांधारी की दृष्टि पड़ने से उसका शरीर कठोर हो जाएगा।

गांधारी अपने पुत्र दुर्योधन से कहती है कि हे पुत्र गंगा जाकर स्नान कर के निवस्त्र मेरे सामने आओ। इसलिए दुर्योधन अपनी माता की आज्ञा का पालन करने के लिए ऐसा ही करते हैं।


रास्ते में उन्हें श्रीकृष्ण मिलते हैं और दुर्योधन को बातों में फंसा कर कहते हैं कि आप इस अवस्था में कहाँ जा रहे हैं? दुर्योधन ने जवाब दिया कि मां ने मुझे इसी अवस्था में बुलाया है। श्रीकृष्ण उनसे कहते हैं कि अब आप वयस्क हो चुके हैं और नग्न हो कर मां के सामने जाना उचित नहीं है और श्रीकृष्ण हसंने लगते हैं।

कृष्ण की बात सुनकर दुर्योधन अपने अपने गुप्तांग पर केले के पत्ते बांध लेता है और कहता है कि मैं स्नान कर के आ गया हूँ माता। तब गांधारी कहती है मैं क्षणभर के लिए अपनी आंखों पर बंधी ये पट्टी खोलने जा रही हूं।

गांधारी जैसे ही अपनी पट्टी खोलती है तो उसकी दृष्टि दुर्योधन के शरीर पर पड़ती है और उसका शरीर कठोर हो जाता है लेकिन जिस जगह केले के पत्ते बंधे होते हैं वह हिस्सा दुर्बल रह जाता है। गांधारी उस से केले के पत्ते पहन कर आने का कारण पूछती है तब दुर्योधन कहता है कि मैं आपके सामने नग्न कैसे आता माताश्री?
वह इसके बात सारी बात दुर्योधन को बताती है तो वह कहता है कि मैं दोबारा आता हूँ और आप फिर से मुझे पट्टी खोल के देखें तब वह कहती है कि मैं अपनी शक्ति का उपयोग एक ही बार कर सकती थी और वह बेहद दुखी होती है।