Friday, 19 June 2020

सूर्य ग्रहण 2020 - जानें कब लगेगा ग्रहण और सूतक काल?

21 जून 2020 को सूर्य ग्रहण : न करें ये ...
ग्रहण (Grahan)इस शब्द में ही नकारात्मकता झलकती है। एक प्रकार के संकट का आभास होता है, लगता है जैसे कुछ अनिष्ट होगा। ग्रहण एक खगोलीय घटना मात्र नहीं हैं एक और जहां इसका वैज्ञानिक महत्व है तो दूसरी और ज्योतिषाचार्यों के अनुसार यह एक आध्यात्मिक घटना होती है जिसका जगत के समस्त प्राणियों पर काफी प्रभाव पड़ता है। विशेषकर सूर्य ग्रहण एवं चंद्र ग्रहण का। साल 2020 में दो सूर्य ग्रहण लगेंगें। हालांकि यह आंशिक ग्रहण होंगे। आइये जानते हैं कब कब यह सूर्य ग्रहण लगेंगे और कहां कहां इन्हें देखा जा सकेगा। साथ ही इस लेख में आप जानेंगें कि सूर्य ग्रहण (Surya Grahan) के दौरान क्या-क्या सावधानियां आपको रखनी चाहिये। ग्रहण के दुष्प्रभाव से बचने व अपने जीवन को समृद्ध बनाने के लिये सूर्य ग्रहण के समय अपनी कुंडली के अनुसार ज्योतिषीय उपाय भी किये जाते हैं।

कब लगता है सूर्यग्रहण

वैज्ञानिकों के अनुसार जब पृथ्वी चंद्रमा व सूर्य एक सीधी रेखा में हों तो उस अवस्था में सूर्य को चांद ढक लेता है जिस सूर्य का प्रकाश या तो मध्यम पड़ जाता है या फिर अंधेरा छाने लगता है इसी को सूर्य ग्रहण कहा जाता है।

कितने प्रकार का होता है सूर्य ग्रहण

पूर्ण सूर्य ग्रहण - जब पूर्णत: अंधेरा छाये तो इसका तात्पर्य है कि चंद्रमा ने सूर्य को पूर्ण रूप से ढ़क लिया है इस अवस्था को पूर्ण सूर्यग्रहण कहा जायेगा।
खंड या आंशिक सूर्य ग्रहण - जब चंद्रमा सूर्य को पूर्ण रूप से न ढ़क पाये तो तो इस अवस्था को खंड ग्रहण कहा जाता है। पृथ्वी के अधिकांश हिस्सों में अक्सर खंड सूर्यग्रहण ही देखने को मिलता है।
वलयाकार सूर्य ग्रहण - वहीं यदि चांद सूरज को इस प्रकार ढके की सूर्य वलयाकार दिखाई दे यानि बीच में से ढका हुआ और उसके किनारों से रोशनी का छल्ला बनता हुआ दिखाई दे तो इस प्रकार के ग्रहण को वलयाकार सूर्य ग्रहण कहा जाता है। सूर्यग्रहण की अवधि भी कुछ ही मिनटों के लिये होती है। सूर्य ग्रहण का योग हमेशा अमावस्या के दिन ही बनता है।

2020 में कब लगेगा सूर्य ग्रहण?

आगामी सूर्य ग्रहण वर्ष का तीसरा और आखिरी सूर्य ग्रहण है 2020 का पहला सूर्य ग्रहण 21 जून को लग है। और इसके बाद 14 दिसंबर को दूसरा सूर्य ग्रहण लग है।
इस बार सूतक काल नहीं लग रहा है।  वहीं 21 जून 2020 को सुबह 9 बजतक 16 मिनट से सूर्य ग्रहण शुरू होगा और दोपहर 03 बजकर 04 मिनट पर यह ग्रह समाप्त होगा। बात करें इस वर्ष के आखरी सूर्य ग्रहण की तो 14 दिसंबर 2020 को यह सूर्य शाम 07 बजकर 04 से शुरू होगा और 15 दिसंबर को रात्रि 12 बजकर 23 पर समाप्त होगा। यह ग्रहण भारत समेत सऊदी अरब, कतर, सुमात्रा, मलेशिया, ओमान, सिंगापुर, नॉर्थन मरिना आईलैंड, श्रीलंका और बोर्नियो में दिखाई देगा। 

सूर्य ग्रहण की पौराणिक कथा

मत्स्यपुराण की कथानुसार, जब समुद्र मंथन से अमृत निकला था तो राहु नाम के दैत्य ने देवताओं से छिपकर उसका पान कर लिया था। इस घटना को सूर्य और चंद्रमा ने देख लिया था और उसके इस अपराध को उन्होंने भगवान विष्णु को बता दिया था। इस पर श्रीविष्णु को क्रोध आ गया था और उन्होंने राहु के इस अन्यायपूर्ण कृत से उसे मृत्युदंड देने हेतु सुदर्शन चक्र से राहु पर वार कर दिया था और परिणाम स्वरूप राहु का सिर और धड़ अलग हो गया लेकिन अमृतपान की वजह से उसकी मृत्यु नहीं हुई। वहीं राहु ने सूर्य और चंद्रमा से प्रतिशोध लेने के लिए दोनों पर ग्रहण लगा दिया, जिसे आज हम सब सूर्यग्रहण और चंद्रग्रहण के नाम से जानते हैं।  

सूर्य ग्रहण समय (Surya Grahan Date And Timing)

जैसा कि लेख में जानकारी दी गई है कि पहला व दूसरा सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई देगा।  ग्रहण का सूतक काल वैसे तो ग्रहण से 12 घंटे पहले शुरु हो जाता है लेकिन 2020 के सूर्य ग्रहण में भारतीयों को प्रभावित नहीं करेगा क्योंकि इस बार सूतक काल नहीं हैं। पहले सूर्य ग्रहण का समय कुछ इस प्रकार रहेगा-
ग्रहण प्रारम्भ काल – प्रातः 09:16 (21 जून 2020) से
ग्रहण समाप्ति काल – दोपह  03 :04 (21 जून 2020) तक


सूर्य ग्रहण पर क्या रखें सावधानियां

एस्ट्रोयोगी  ज्योतिषाचार्यों की सलाह है कि ग्रहण काल के समय खाना न खांए न ही कुछ पीयें, प्रभु का स्मरण करते हुए पूजा, जप, दान आदि धार्मिक कार्य करें। इस समय नवग्रहों का दान करना भी लाभकारी रहेगा। जो विद्यार्थी अच्छा परिणाम चाहते हैं वे ग्रहण काल में पढाई शुरु न करें बल्कि ग्रहण के समय से पहले से शुरु कर ग्रहण के दौरान करते रहें तो अच्छा रहेगा। घर में बने पूजास्थल को भी ग्रहण के दौरान ढक कर रखें। ग्रहण से पहले रात्रि भोज में से खाना न ही बचायें तो अच्छा रहेगा। यदि दुध, दही या अन्य तरल पदार्थ बच जांयें तो उनमें तुलसी अथवा कुशा डालकर रखें इससे ग्रहण का प्रभाव उन पर नहीं पड़ेगा। ग्रहण समाप्ति पर पूजा स्थल को साफ कर गंगाजल का छिड़काव करें, देव मूर्ति को भी गंगाजल से स्नान करवायें व तदुपरांत भोग लगायें।