Wednesday, 10 June 2020

शिवाजी महाराज की भवानी तलवार कहां पर हैं? जानकर आप भी हैरान रह जाएंगे


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बता दे शिवाजी महाराज की तलवार को भवानी तलवार के नाम से जाना जाता है लेकिन दोस्तों ज्यादातर लोगों के मन में यह प्रश्न उठता है कि शिवाजी महाराज की भवानी तलवार वर्तमान समय में कहां पर है आज हम आप लोगों को उसी के बारे में बताने जा रहे हैं।

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छत्रपति शिवाजी महाराज की भवानी तलवार कहा है ऐसा सवाल हर किसी को पड़ता है. लोकमान्य तिलक से दौर से यह सवाल बिच बिचमे चर्चा में आ रहा है. लेकिन देखा जाए तो इंग्लैंड के बैंकिंगहैण्ड राजमहल में ये तलवार है ऐसा लोगों का मानना है. लोकमान्य तिलक ने यह तलवार फिर से हमारे देश लेन के लिए प्रयास करने चाहिए ऐसी कविता राम गणेश गडकरी ने लिखी थी. १९८० में बॅ.अब्दुल रहमान अंतुले महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री थे तब उन्होंने मै भवानी तलवार यहाँ लाकर ही रहूँगा ऐसी घोषणा भी की थी लेकिन असल में कुछ भी नहीं हुआ. इस लिए उन्होंने इंग्लैण्ड का दौरा भी किया और आते समय उस तलवार का तथाकथित चित्र ले आये. उसके बाद यह तलवार चर्चा तब आई जब केंद्र में भाजपा की सरकार आई. जून २००२ में तत्कालीन केंद्रीय गृहमंत्री लाल कृष्ण अडवाणी पांच दिन के लिए स्पेन के दौरे पर गए थे. उस समय उन्हें स्पेन के कुछ संशोधकों ने बताया की शिवाजी महाराज की भावना तलवार स्पेन के तोलेदो ये शस्त्र निर्मिती के लिए जाने जानेवाले शहरों के करागीरों ने बनाई है. उसे लेकर फिर एक बार राजनीती गरम हुई और फिर कुछ दिनों बाद ठंडी हुई।

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करीबन ९० साल पहले मुंबई के कॅप्टन बहादुर मोदी नमक एक आदमी में भवानी तलवार मेरे पास है ऐसा दावा किया था और उसके ऊपर शिवाजी महाराज ऐसा नाम है लेकिन बाद में साबित हुआ यह पदमजी नमक एक इन्सान इस तलवार पर यह लिखा था. वैसे ही इन्दुर महू में जो तलवार है वो शिवाजी महाराज ने राजा छत्रसाल को दी थी लेकिन यह भी झूट निकला क्यों की उसके ऊपर उनके सेनापति का नाम था.

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रियासतकारों के कहने के मुताबिक रायगड जितने के बाद भवानी तलवार औरंगजेब के हाथ लगी थी जो उसने बाद में शाहू महाराज के विवाह में उन्हें भेट दी थी. इसका मतलब यह होता है की वह तलवार सातारा में होने चाहिए जहा उनके वंशज अभी उदयनराजे भोसले है. १९७४ में बाबासाहेब पुरंदरे ने मुंबई में शिवसृष्टि का प्रदर्शन रखा था जहा उन्होंने सातारा की वह तलवार भवानी तलवार है ऐसी रखी थी लेकिन ज्येष्ठ इतिहाससंशोधक ग. ह. खरे ने उन्हें इस तलवार पर लिखा लेख पढ़कर दिखाया जिससे यह साबित हुआ की यह तलवार भवानी तलवार नहीं है।